Chennai Flood 2015 Essay In Hindi

How Indian army is helping Chennai flood victims

How Indian army is helping Chennai flood victims

Text: PTI

Navy and Air Force today continued their relief and rescue operations in flood-affected Chennai by pressing into service multiple flights and evacuating over 5,000 people from submerged parts of the city.

In pic: Two columns of Army team embarking on IAF C-17 Aircraft along with bouts heading to Chennai for Rescue and Relief ops from AFS Begumpet, Hyderabad.

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4 Indian Army columns airlifted

On completion of airlift of four National Disaster Relief Force (NDRF) teams from Delhi and 10 others from Bhubaneswar to Arakkonam, four Indian Army columns were today airlifted by the transport aircraft of the Indian Air Force (IAF).

In pic: Two columns of Army team embarking on IAF C-17 Aircraft along with bouts heading to Chennai for Rescue and Relief ops from AFS Begumpet, Hyderabad.

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Stranded passengers brought back

One C-130J from Tambaram to Delhi, and two C-17s from Arakkonam got back stranded passengers to Begumpet and Delhi.

In pic: Loaded trucks with boats embark on IAF C-17 Aircraft along with two columns of Army teams heading to Chennai for Rescue and Relief ops from AFS Begumpet, Hyderabad.

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Helicopter operations in full swing

Helicopter operations too were in full swing with four medium lift helicopter, one advance light helicopter and five Chetak/Cheetah involved actively to evacuate stranded people. One helicopter is positioned in Tirupati to aid the Andhra Pradesh government.

In pic: Army personnel rescuing kid from a flooded locality in rain-hit Chennai.

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Five engineer teams

The Army has put in total 40 rescue and relief teams and five engineer teams for carrying out rescue operations in the most critical areas of Chennai.

In pic: Army personnel rescuing people from a flooded locality in rain-hit Chennai.

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Tambaram and Mudichur among worst hit

These teams have been operating in areas which are the worst hit by the floods in the areas of Tambaram, Mudichur, Kothurpuram, Pallavaram, Thiruneermalai, Urapakkam, Manipakkam, T Nagar and Gudvancheri towards the outskirts of Chennai and also along areas adjacent to Adyar River.

In pic: Army personnel rescuing people from a flooded locality in rain-hit Chennai.

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4,000 stranded people rescued

The rescue teams have successfully rescued over 4,000 stranded people. Military Hospital at St Thomas Mount has been made functional and treatment is being given to many flood- affected patients.

Though limited, troops available at Chennai for carrying out flood relief were kept on high alert following the floods in the city last month.

In pic: Army personnel rescuing people from a flooded locality in rain-hit Chennai.

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Bengaluru teams answered distress calls

The Army has also sent additional teams from Bengaluru and is now shifting troops from Secundrabad and Hyderabad for augmenting rescue efforts.While on its way to Chennai, Army rescue teams from Bengaluru answered distress calls from the worst affected areas and helped stranded civilians along the way.

In pic: Army personnel rescuing people from a flooded locality in rain-hit Chennai.

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30 Army trucks deployed

Inspite fast flowing currents at a few places, the Army teams are presently reaching out to the most affected and critical areas, sources said. Over 30 Army trucks have also been employed by the rescue teams for ferrying stranded people in areas where the water level is less than 6 feet.

In pic: Army personnel rescuing woman from a flooded locality in rain-hit Chennai

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Additional 9 rescue and relief teams

The Army is also rushing in additional nine rescue and relief teams with one medical team from Secunderabad and Hyderabad to Arakkonam by IAF's C17 Globemaster for addressing any contingencies.

In pic: Army personnel carry children on their shoulders as they wade through flood waters in rain-hit Chennai.

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Army resorts to radio communication

With civil communication and Mobile Towers out of Communication in critical areas of Chennai, the Army is resorting to radio communication for coordinating rescue operations and has also successfully re-established communication at some essential locations.

In pic: Army personnel rescuing a man from a flooded locality in rain-hit Chennai

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प्रस्तावना: - कहते हैं कुदरत से बड़ा कोई नहीं होता है। जब प्रकोप बरसाती है तो वह किसी को नहीं छोड़ती है पर उस प्रकोप के असर को इंसान चाहे तो अपने प्रयासों से कम कर सकता है। लेकिन इंसान ने पिछले कुछ दशकों में जो कथित विकास किया, उसमें कुदरत के कहर को नजरंदाज ही कर दिया। परिणाम यह हुआ कि चैन्नई में अभी हाल ही नवंबर सन्‌ 2015 में भीषण बाढ़ के रूप में हमारे सामने प्रकट हुआ है महानगर कहा जाने वाला यह शहर पानी में डूब गया है। सारा जनजीवन ठप हो गया है। मुबंई की बाढ़, केदारनाथ की तबाही, श्रीनगर की आपदा, ये कुछ ऐसे संकेत हैं, जो हमें एक के बाद एक देखने को मिल रहे हैं। शहरों के निर्माण में जल प्रबंधन और जल निकासी तंत्र पर जोर ही नहीं दिया गया। जो पानी अमृत हो सकता है, वह बेकार बह रहा है और तबाही का सबब बन गया है, जिसके कसूरवार हम भी कम नहीं।

चेन्नई: - की बाढ़ को समझने के लिए दो बिन्दुओं पर विचार करना जरूरी होगा।

  • पहला, चेन्नई की बाढ़ क्या पर्यावरण में आ रहे बदलावों के नतीजे हैं?
  • दूसरा, तमिलनाडु में नगर नियोजन के इन बाढ़ों से निपटने के लिए क्या उपाय किए गए थे?

रिकॉर्ड: - चेन्नई की घटना बदलते पर्यावरण का नतीजा हो भी सकती हैं या नही भी हो सकता है चेन्नई की इस बारिश के लिए यह कहा जा रहा है कि पिछले 100 सालों का रिकॉर्ड टूटा है तो इसका मतलब यह हुआ कि ऐसी बारिश सौ साल पहले भी हुई थी। ऐसी घटनाएं प्राकृतिक तौर पर होती रही हैं और होती रहेंगी।इन घटनाओं में पर्यावरण में आ रहे बदलावों की वजह से थोड़ी बढ़ोतरी हो जाएगी। इसमें निरंतरता आ जाएगी। मतलब 2014 अगर दुनिया में सबसे ज्यादा गर्म साल रहा तो 2015 बीते साल की तुलना में और ज्यादा गर्म रहने की आशंका जताई जा रही है।

कैग: -नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने 2014 में एक मूल्यांकन किया कि क्या तमिलनाडु ने बाढ़ से निपटने के लिए सक्षम हैं? क्या सकरार ने बाढ़ को रोकने के लिए जो उपाय पर गौर फरमाया है वह है क्या? कैग के मूल्यांकन में जो निष्कर्ष सामने आए वह बहुत निराश करने वाले थे। तमिलनाडु सरकार ने बाढ़ को रोकने की दिशा में कोई खास पहल नहीं किए थे। चेन्नई में कुछ दशक पूर्व तक करीब 650 अलग-अलग जलाशय थे, जो अब बचकर सिर्फ 27 ही रह गए थे। पहले बारिश होती थी तो उसे ताल, तलैये, तालाब, नदी गड्‌ढे अपनी गोद में आश्रय देते थे। लेकिन जब इन्हें खत्म कर दिया तो जाहिर है कि वह आपके मकान, दुकान और स्कूलों में घुस जाएगा। इन जलाशयों में मिट्‌टी भर-भरकर मकान, मॉल्स और अपार्टमेंट बना दिए गए है जाहिर हैं कि इसे किसी शहर को बसाने की अच्छी योजना तो नहीं कही जा सकती है। वर्तमान सरकार ने देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाने की बात की है। अगर उन नए शहरों को बसाने में पानी निकासी योजना की की व्यवस्था यूं ही ढीली-ढाली रही तो आपदाओं में कई गुना इजाफा हो जाएगा।

योजनाएं: -निम्न हैं-

  • तमिलनाडु की नदियों के सरंक्षण के लिए 2000 में एक परियोजना शुरू की गई थीं। 2009 में एक अनुमान किया गया कि इस पर 1700 करोड़ रुपए की लागत आएगी। केंद्र सरकार इस परियोजना के लिए 633 करोड़ रुपए अब तक आवंटित कर चुकी है। 2014 तक 314 करोड़ रु. सिर्फ चेन्नई खर्च कर चुका है।
  • नगरिकों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो सितंबर 2015 में मद्रास उच्च न्यायालय ने सभी संबद्ध प्राधिकरणों को पल्लीकरणई झील के आसपास की झुग्गी-झोपड़ी को हटाने के आदेश दिए। 2007 में तालाब संरक्षण और उन पर अनाधिकृत कब्जों को हटाने के लिए कानून बनाए गए, लेकिन इसका असर कहीं नहीं दिखा।
  • पर्यावरण व जल संसाधन अभियांत्रिकी, चेन्नई के अनुसार, 1980 में यहां 600 से ज्यादा जलस्रोत मौजूद थे। लेकिन 2008 में जब मास्टर प्लान प्रकाशित हुआ तो उसमें इस बात का जिक्र था कि लगभग सभी तालाब बहुत बदतर हालत में पहुंच चुके है। राज्य जल संसाधन विभाग के अनुसार, यहां के 19 बड़े तालाब जो 1980 तक 1130 हेक्टेयर भूभाग पर पसरे हुए थे, 2000 तक आते जाते वे सिकुड़कर मात्र 645 हेक्टेयर तक रह गए। इन जलस्रोतों के आसपास 30 हजार झुग्गी-झोपड़ियों बसी हुई हैं, जिसके चलते ड्रेनज सिस्टम पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
  • जलस्रोतों के लगातार नष्ट होने, बदहाल ड्रेनज सिस्टम और हरियाली में लगातार आ रही कमी को देखने से यह समझ में आता है कि नगर नियोजन में बाढ़ से निपटने की कोई सोच शामिल नहीं की गई है। तमिलनाडु सरकार नदियों और सीवेज सिस्टम को ठीक करने के लिए अब तक बहुत पैसे बहा चुकी है। 1998 मेें सरकार द्वारा बाढ़ से निपटने के लिए 300 करोड़ रुपए की योजना शुरू हुई, जिसकी मुख्य चिंता ढांचागत सुविधाओं को बेहतर और दुरुस्त बनाने का रहा। इस योजना में विभिन्न जलाशयों की साफ-सफाई और उसके रख-रखाव भी शामिल किए गए थे। लेकिन इसका बहुत ज्यादा फायदा नहीं हुआ।

आईजीपीसीसी: - पर्यावरण में बदलाव दर्ज हो रहा है, इस बारे में किसी को कोई संदेह नहीं है। संयुक्त राष्ट्रसंघ की आईजीपीसीसी (इंटर गर्वन्मेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज) की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में अतिवृष्टि, अनावृष्टि, अतिगर्मी और अतिसर्दी जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं और आनेवाले समय में इसमें और इजाफा होगा। इंडिया इन्स्टीट्‌यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीट्रोलॉजी ने देश के पिछले 50 साल के रिकार्ड के विश्लेषण के आधार पर यह बताया है कि अतिवृष्टि की घटनाएं बढ़ रही हैं। जर्मनी की एक शोध संस्था ने पिछले 30 साल के मौसम का अध्ययन किया जिसके आधार पर यह कहा कि हर साल दुनियाभर में 12 फीसदी बारिश ज्यादा हो रही है। लेकिन इन सबके बावजूद किसी अकेली घटना के बारे में आप उसे पर्यावरण बदलावों का नतीजा नहीं बता सकते हैं।

आईपीसीसी की पांचवी मूल्यांकन रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दशकों में बेमौसमी घटनाएं और बढेंगी। भारत इनके प्रति ज्यादा कमजोर स्थिति में है। इसकी एक बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन को माना गया है। गौरतलब है कि दुनिया में इस समय पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन चल रहा हे। वहीं भारत में तमिलनाडु बाढ़ से ग्रस्त है तो कई विकसित देशों ने भारी बर्फबारी और तुफान-चक्रवात झेले हैं। अरसे से विकसित देश विकाशील देशों पर कार्बन फुटप्रिंट कम करने का दबाव डालते रहे हैं। पर खुद विकसित देशों द्वारा ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कहीं ज्यादा है। पेरिस में इन विरोधाभास के दूर होने की उम्मीद हे। गौरतलब है कि पिछले कुछ बरसों में भारत में भारी बारिश से एक के बाद एक तबाही की घटनाएं देखने को मिली हैं। 2005 में मुबंई में आई बाढ़ के बाद, केदारनाथ में तबाही, श्रीनगर में आपदा ने सबका ध्यान खींचा है। जानकार हिमालयन रेंज में हो रही मानवीय छेड़छाड़ को भी भूस्खलन और जल भराव का कारण मानते हैं।

नुकसान: - निम्न हुआ हैं-

  • चेन्नई में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड 163 कंपनियां हैं। इनका बाजार पूंजीकरण 2 लाख 85 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। चेन्नई बड़ा ऑटोमोबाइल और आईटी इंडस्ट्री हब है। बाढ़ ने तमाम निर्माण गतिविधियों को ठप कर दिया है।
  • एसोचैम के मुताबिक चेन्नई और तमिलनाडु के अन्य हिस्सों में भारी बारिश के कारण 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है।
  • इस बाढ़ के बाढ़ के कारण चेन्नई की पूरी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है जिससे उभरने के लिए काफी समय लगेगा।
  • चेन्नई में इस बाढ़ के कारण व्यक्ति को उसकी मूलभूत आवश्यकताएं नहीं मिल पा रही है अर्थात जनजीवन पर इसका असर बहुत अधिक पड़ा है।

ड्रेनज सिस्टम: - चेन्नई, उत्तराखंड, कश्मीर, मुबंई या कोई सा भी उदाहरण ले लें तो आप इन सभी जगहों पर एक बड़ी दिक्कत यह पाएंगे कि यहां पानी निकासी (ड्रेनज सिस्टम) की व्यवस्था या तो आधे शहरों में है और आधे शहरों में या तो नहीं हैं या बहुत ही खराब हालात में हैं। ड्रेनज सिस्टम अगर है भी तो उसमें हर साल गाद जमा होता जाता है, उसके साफ-सफाई के लिए कोई इंतजाम नहीं किये जाते है।

किसी भी शहर की निर्माण योजना में उसका ड्रेनेज तंत्र प्रमुख प्राथमिकता होती है। बाढ़ या भारी बारिश से शहरों को डूबने से बचाने का जरिया एक अच्छा ड्रेनेज सिस्टम ही होता है। पर भारत में चेन्नई, मुबंई, कोलकाता और दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों से लेकर दूसरे और तीसरे पायदान वाले शहरों के ड्रेनेज सिस्टम की हर बार मानसून और बेमौसम बारिश में पोल खुल जाती है। उस दौरान किसी कस्बे और मेट्रो में कोई फर्क नहीं रह जाता हैं। सड़कों पर पानी ही पानी और जनजीवन ठप हो जाता है। एक अच्छे ड्रेनेज सिस्टम की निशानी होती है कि किसी भी शहर में जब बारिश होती हो तो वह अपने अंतिम गंतव्य तक स्वत: पहुंच जाए।

ड्रेन-यह निम्न होते हैं-

आवासीय ड्रेन, काउंसिल ड्रेन, क्षेत्रीय ड्रेन, नदियां/क्रीप, खाड़ी

यूं किया जाए डिजाइन- जब भी बारिश होती है तो कुछ पानी स्वत: जमीन में रिस जाता है। बाकी पानी ड्रेनेज के सहारे नदी-नालों में मिलता है और खाड़ी और समुद्र तक पहुंचता है। आजकल विकसित ड्रेनेज सिस्टम बाढ़ और पानी भराव से बचाने के लिए खासतौर पर डिजाइन किया जाता है। हम यहां मेलबर्न शहर में अपनाए जाने वाले एक आदर्श ड्रेनेज सिस्टम का जिक्र कर रहे हैं।

1 घरों-भवनों में वर्षा का पानी भवन के नीचे दबे पाइपों और गटर से होता हुआ आवासीय ड्रेन में जाता है।

2 आवासीय ड्रेन गली-सड़कों की ड्रेन या काउंसिल ड्रेन से जुड़ती है।

3 फिर काउंसिल ड्रेन एक क्षेत्रीय (रीजनल) ड्रेन से जुड़ती है।

4 क्षेत्रीय ड्रेन का पानी फिर निकटतम नदी में समाहित होता है।

5 नदियां फिर अाखर में खाड़ी में जाकर मिल जाती हैं।

उपसंहार: -घर, दुकान-बाजार, सड़कों पर बारिश के पानी को निकालने के लिए एक वैकल्पिक रास्ते की सख्त जरूरत होती है। बारिश या तुफानी वर्षा के दिनों शहर में तेजी से पानी की आवक होती है। बिना व्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम के यह शहर के घरों, सड़कों पर भर जाता है। भरते-भरते बाढ़ के से हालात पैदा हो जाते हैं। और फिर सब थम जाता हे। ऐसे हालात से बचने के लिए विकसित देशों में अपनाए जाने वाले ड्रेनेज सिस्टम को हमारे शहरों की प्लानिंग में शामिल करने की सख्त जरूरत है। तभी हम आगे आने वाली इन प्राकृतिक तबाही से बच सकते हैं।

- Published/Last Modified on: January 22, 2016

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